Pregnancy Diet Chart in Hindi: प्रेगनेंसी के नौ महीने में क्या खाना चाहिए

Pregnancy Diet Chart in Hindi: प्रेगनेंसी के नौ महीने में क्या खाना चाहिए

गर्भावस्था (Pregnancy in Hindi) में स्वस्थ, संतुलित आहार (balanced diet for pregnancy) माँ बनने वाली महिला और उसके बच्चे की सेहत के लिए आवश्यक है। ऐसा इसलिए है क्योंकि गर्भावस्था के दौरान महिला जो कुछ भी खाती है वह बच्चे के लिए पोषण का मुख्य स्रोत है।

होने वाली माँ के आहार (diet chart for pregnant woman) में विभिन्न प्रकार के स्वस्थ खाद्य पदार्थ जैसे फल, सब्जियाँ और प्रोटीन शामिल होने चाहिए ताकि बच्चे को वृद्धि और विकास के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण पोषक तत्व और पोषण प्रदान किया जा सके।

जब गर्भावस्था में स्वस्थ खाने की बात आती है, तो यह तय करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है कि आपके और आपके बच्चे के स्वास्थ्य के लिए कौन से खाद्य पदार्थ (santulit aahar) सबसे अधिक फायदेमंद हैं।

गर्भवती आहार चार्ट (Indian Pregnancy Diet Chart Month by Month in Hindi)

सोच रही हूं कि गर्भावस्था के दौरान क्या खाया जाए? नीचे महिलाओं के लिए डाइट चार्ट (pregnancy diet chart hindi) दी गई है जिसमें आपके बच्चे के उचित विकास के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व मौजूद हैं।


पहली तिमाही – 1st-14th सप्ताह (First Trimester in Hindi)


पहले 4 सप्ताह में समृद्धि युक्त आहार लें, जैसे कि फल, सब्जियां, और गेहूं के अनाज। शुरुआती दिनों में तले हुए चीज़ें और जंक फ़ूड से बचें।
विचार: आपको शांत और स्वस्थ वातावरण में रहना चाहिए।
अगले 5वें से 8वें सप्ताह: शिशु के विकास में महत्वपूर्ण हैं।
आहार: मांस, मछली, दlल, और पनीर जैसे उच्च-प्रोटीन खाद्य पदार्थों को शामिल करें।
विचार: ध्यानपूर्वक योजना बनाएं, जिसमें स्वस्थ्यपूर्ण आहार और प्रतिदिन की व्यायाम शामिल हों।
9वें से 14वें सप्ताह: विटामिन और मिनरल्स का सही स्रोत l
आहार: फलों और सब्जियों में सही विटामिन और मिनरल्स मिलते हैं। एक कप दूध या दूध से बनी चीजें पिएं।
विचार: सुनिश्चित करें कि आप पूरे दिन में पर्याप्त पानी पी रही हैं।

दूसरा तिमाही- 14वां से 28वां सप्ताह (Second Trimester in Hindi)

15वां से 19वां सप्ताह: गुड़ और प्राकृतिक मिठाईयां l
आहार: गुड़, शहद, और देसी चीनी से बनी मिठाईयों को शामिल करें। इनसे इंसुलिन स्तर को नियंत्रित करने में मदद होगी।
विचार: योगा और ध्यान शांति और स्वस्थ गर्भावस्था के लिए उपयुक्त हैं।
20वां से 23वां सप्ताह: ताजगी और हाइड्रेशन l
आहार: अब ज्यादा मात्रा में पानी पीने का समय है। इससे आपका शरीर हाइड्रेटेड रहेगा और शिशु का विकास भी ठीक से होगा।
विचार: आपको अब और भी आराम करना चाहिए, उचित आराम लें।
24वां से 28वां सप्ताह: विशेषज्ञ से मुलाकात करें l
आहार: डॉक्टर से सलाह लेकर अपनी आहार योजना को बनाएं और उसे अनुसरण करें।
विचार: डॉक्टर की सलाह लेकर योग या किसी अन्य सुशील व्यायाम का अभ्यास करें।

तृतीय तिमाही – 28वां से 40वां सप्ताह (Third Trimester in Hindi)


28वां से 32वां सप्ताह: विश्राम और योगा l
आहार: इस महीने में अलसी, पालक, लाल मांस, शलजम, और सूखे मेवे खाये।
विचार: विश्राम और आराम का समय है, और योगा आसनों को शामिल करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है।
• 33वां से 36वां सप्ताह: सावधानियां और तैयारी
आहार: अब आपको अपने आहार में ज्यादा प्रोटीन, फोलेट, और आयरन शामिल करना चाहिए।
विचार: सफल प्रसव के लिए अपने प्रसूति एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ (OBGYN in Hindi) के साथ डिलिवरी प्लान को तैयारी करें।
37वां से 40वां सप्ताह: आंतर-जानुभाव
आहार: पोषण से भरपूर आहार लें और अधिकतम पानी, नारियल का पानी पीने का प्रयास करें।
विचार: आंतर-जानुभाव के लिए ध्यान और सामंजस्य बनाए रखें, और आने वाले समय की तैयारी करें।

गर्भावस्था के दौरान खाने योग्य खाद्य पदार्थ (What to Eat During Pregnancy in Hindi)


डेयरी उत्पाद: डेयरी उत्पाद कैल्शियम और विटामिन जैसे विभिन्न पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं जो बच्चे के विकास में सहायता करते हैं।
फलियां: फलियां (Legumes in hindi) पौधे आधारित पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं जो प्रोटीन, फाइबर, आयरन, फोलेट और कैल्शियम प्रदान करती हैं, जिनकी गर्भावस्था के दौरान अधिक आवश्यकता होती है।
शकरकंद: शकरकंद में बीटा कैरोटीन नामक विटामिन प्रचुर मात्रा में होता है, जो स्वस्थ भ्रूण के विकास के लिए आवश्यक है।
ब्रोकोली और गहरे, पत्तेदार साग: ब्रोकोली जैसे गहरे, पत्तेदार साग विटामिन ए, सी, बी 6, के, फोलेट और एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होते हैं। इसलिए, वे अच्छी हीमोग्लोबिन आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं l
प्रोटीन: दुबला मांस (Lean Meat) अच्छी गुणवत्ता वाले प्रोटीन का एक उत्कृष्ट स्रोत है, जो गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।
साबुत अनाज: साबुत अनाज खनिज और विटामिन बी से भरपूर होते हैं जिनकी बढ़ते भ्रूण को उसके शरीर के लगभग हर हिस्से में विकास के लिए आवश्यकता होती है।
सूखे मेवे: सूखे मेवों में कैल्शियम, पोटैशियम और जिंक की मात्रा अधिक होती है। फाइबर से भरपूर होने के कारण ये गर्भावस्था में कब्ज को रोकने में मदद करते हैं।
पानी: गर्भावस्था के दौरान रोजाना कम से कम 8-11 गिलास पानी पीना जरूरी है। यह बेहतर पाचन में मदद करता है और भ्रूण के चारों ओर एमनियोटिक द्रव नामक सुरक्षात्मक द्रव को बनाए रखता है।

गर्भावस्था में किन खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए? (What to Avoid Eating in Pregnancy in Hindi)


कैफीन: कैफीन एक उत्तेजक पदार्थ है जो आपकी हृदय गति और रक्तचाप को बढ़ाता है, जो गर्भावस्था में हानिकारक हैं। इसके अलावा, कैफीन प्लेसेंटा को पार कर सकता है, जो आपके और आपके बच्चे के बीच की बाधा है।
कच्चे अंकुर: कच्चे अंकुर (Raw Sprouts) गर्म और आर्द्र परिस्थितियों में पनपते हैं, जो बैक्टीरिया (जैसे साल्मोनेला और ई. कोली) के विकास के लिए आदर्श होते हैं। इसलिए कच्चे स्प्राउट्स का सेवन आपको बीमार बना सकता है।
बिना धुले उत्पाद: गर्भावस्था में बिना धोए या दूषित खाद्य उत्पादों का सेवन करने से आप टोक्सोप्लाज्मा गोंडी नामक हानिकारक परजीवी के संपर्क में आ सकते हैं, जो अधपके मांस और बिना धुली सब्जियों में प्रचुर मात्रा में होता है।
बिना पाश्चुरीकृत दूध, पनीर और फलों का रस(Unpasteurized milk): कच्चे, बिना पाश्चुरीकृत दूध में ई.कोली, लिस्टेरिया और कैम्पिलोबैक्टर जेजुनी जैसे बैक्टीरिया हो सकते हैं, जो खाद्य जनित बीमारियों को जन्म दे सकते हैं।
शराब: गर्भावस्था की पहली तिमाही में शराब का सेवन बच्चे में संरचनात्मक दोष पैदा कर सकता है; अर्थात्, शिशु के चेहरे की विशेषताएं असामान्य हो सकती हैं।
प्रसंस्कृत जंक फूड: गर्भावस्था के दौरान प्रसंस्कृत जंक फूड (Processed Junk Food) का सेवन करने से मां के शरीर में एक्रिलामाइड नामक विषाक्त पदार्थ की मात्रा बढ़ सकती है, जो बच्चे के लिए हानिकारक है।
कच्ची मछली: पूरी तरह पकी हुई मछली की तुलना में कच्ची मछली में परजीवी, बैक्टीरिया या सूक्ष्मजीव होने की अधिक संभावना होती है। आप अपने बच्चे को उनके सामने उजागर नहीं करना चाहेंगे!
अधपका, कच्चा और प्रसंस्कृत मांस: प्रसंस्कृत मांस में लिस्टेरिया बैक्टीरिया होने की संभावना होती है जो गर्भवती महिलाओं में भोजन विषाक्तता और उल्टी का कारण बन सकता है। कच्चे और अधपके मांस में बैक्टीरिया सहित सूक्ष्मजीव होने की भी संभावना होती है जो बीमारी को जन्म दे सकते हैं।
कच्चे अंडे: गर्भावस्था में कच्चे अंडे खाने से बचना चाहिए क्योंकि उनमें साल्मोनेला नामक रोग पैदा करने वाले बैक्टीरिया हो सकते हैं, जो भोजन विषाक्तता, उल्टी और दस्त का कारण बन सकते हैं।

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Conclusion

गर्भावस्था के दौरान स्वस्थ, संतुलित आहार खाना बढ़ते बच्चे के लिए आवश्यक है क्योंकि वह आपके द्वारा खाए गए सभी पौष्टिक भोजन को निगलने की प्रतीक्षा कर रहा है। ऐसे बहुत सारे पौष्टिक खाद्य पदार्थ हैं जिन्हें आप खाकर यह सुनिश्चित कर सकती हैं कि आपका बच्चा सुरक्षित और स्वस्थ है।


ऊपर दिए गए गर्भावस्था के लिए यह भारतीय आहार योजना (Indian pregnancy diet chart) हर किसी के लिए उपयुक्त हो भी सकती है और नहीं भी। इस्लिए अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ को अपने खाने के विकल्पों के बारे में सूचित रखें ताकि जरूरत पड़ने पर वे अतिरिक्त पूरक आहार के साथ आपका मार्गदर्शन कर सकें। एक स्वस्थ, सुपोषित गर्भावस्था का आनंद लें!

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